गरीबी में एक मजदूर का दर्द

आज़ादी से लेकर अब तक गरीबी रेखा को ऊपर-नीचे करके गरीबों की संख्या भले ही घटाई – बढ़ाई जाती रही हो , लेकिन गरीबी की रेखा न ही घटी और न ही गरीब – अमीर के बीच की खाई कम हुयी . हिंदुस्तान में इंडिया और भारत दो अलग -अलग देश बने ही रहे . सरकारे आयी और गयी . गरीबी की बात तो सबने की लेकिन गरीबी (Poverty) को महसूस नहीं किया गया .

मोबाइल की रौशनी में चकाचौंध हुआ भारत एक अमीर देश है जहां गरीब निवास करते हैं . आखिर क्या वजह है की एक तरफ करोडपतियों की संख्या दिन-व-दिन बढती जा रही है तो दूसरी तरफ फुटपाथ पर सोने वालों की संख्या में दिन-दूनी रात चौगुनी वृद्धि हो रही है .

गरीबी – भोजपुरी गीत – रितेश पाण्डेय

गरीबी” Poverty नाम के इस गाने को लिखा है R R Pankaj ने गाया है भोजपुरी गायक रितेश पाण्डेय ने जबकि इसके धुन को बनाया हैआशीष वर्मा ने.
Song :- Garibi
Singer :- Ritesh Pandey
Lyrics :- R R Pankaj
Music Director :- Ashish Verma
Artist :- RiteshPandey, Anup Jeddy, Pooja Das, Rohit Pandey, Chandan Singh, Dipak Singh, Rajesh Rathaur.

अगर विश्व बैंक की माने तो २०१३ के एक आंकड़े के अनुसार गरीबी रेखा (BPL) के निचे रहने वालों की संख्या सबसे अधिक भारत में थी . अर्त्शास्त्री कहते हैं कि भारत में किसान क़र्ज़ में जन्म लेते हैं , क़र्ज़ ,इ बढ़ते हैं और क़र्ज़ में ही मर जाते हैं .

अगर बिहार की बात करें तो यह भारत के सबसे बडे और गरीब राज्यों में से एक है। 2007 तक, बिहार का आर्थिक विकास देश के बाकी हिस्से की तुलना में काफी धीमा था। राज्य की सार्वजनिक सेवाएं देश में सबसे बदतर थे। यहाँ के मजदूरों में से लगभग आधे कृषि मजदूर थे, जोकि राष्ट्रीय औसत का दुगुना है। केवल एक तिहाई महिलाएं साक्षर थीं, बाल-मृत्यु दर काफी अधिक थी, और आधे से भी अधिक बच्चे कुपोषित थे। वहीँ इससे सटे उत्तर प्रदेश की बात करें तो राज्य की 18.९ % आबादी गरीबी रेखा (Below Poverty Line) के नीचे है .

भारतीय कृषि : समस्या और समाधान

वैश्विक महामारी की दौर में मजदूरों के पलायन पर सरकारे जो मौन थीं और उचित आंकड़े प्रस्तुत नहीं कर रही थी . आज सब सामने आ रहा है . मजदूरों का दर्द एक आम दर्द हो चला है . एक आंकड़े के अनुसार दिल्ली , मुम्बई व अन्य राज्यों में रह रहे बिहार, उत्तर प्रदेश , झारखण्ड , उड़ीसा, प. बंगाल इत्यादि के लोग अपने घर जाने के क्रम तक़रीबन ४०० से अधिक लोग काल के गाल में समा चुके हैं . कई लोग भूख से तड़पकर मर गए लेकिन एक वो भी भारत है जहां महज़ चार लोगों के लाने के लिए १८० सीटर विमान किराये पर लिया जाता है और मजदूर पैदल सडक पर भूख से दम तोड़ रहे हैं .

एक मजदूर का दर्द – गुंजन सिंह

ये गाना एक सच्ची घटना से प्रेरित है, इस गाने की सारी कमाई कोरोना पीड़ित फंड में डाल दी जाएगी | गुंजन सिंह के गाये इस दर्द भरे गाने “बबुआ मरल भूख से ” को लिखा है अजय बच्चन ने तथा इसके धुन को तैयार किया है रौशन सिंह ने .
Song : Babuwa Maral Bhukh Se
Singer : Gunjan Singh
Lyrics : Ajay Bachchan
Music : Raushan Singh
Album : Ek Majdur Ka Dard
Casting: Suman Saurabh SIngh , Rohan Pathak

लेकिन सबकुछ बुरा नहीं है , निश्चित ही गरीबों की स्थिति में बदलाव के लिए सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों का असर भी हो रहा है . विश्व सामाजिक सुरक्षा के तहत रोज़गार देने के लिए विश्व बैंक ने मनरेगा को पहले स्थान पर माना है तो वहीं वर्तमान सरकार द्वारा चलाये फाईनेंशियल इन्क्लूजन, DBT, फसल बीमा इत्यादि कार्यक्रम बड़े बदलाव की और संकेत कर रहे हैं. साथ ही जिले स्तर पर क्लस्टर रोजगार के कार्यक्रम भी एक सुन्दर और स्वस्थ भारत की कल्पना की ओर एक प्रशंसनीय कदम है .