बिरहा भोजपुरी संगीत का हृदय है (Birha is the heart of Bhojpuri) ये कहना है बिरहा के सुप्रसिद्ध गायक व लेखक बिरहा सम्राट विजय लाल यादव का।बिरहा का एक अमर इतिहास रहा है। भगवान कृष्ण के जीवन में कितने ही विरह का सामना हुआ- गोपियों कि विरह, राधा की तड़प और कृष्ण का सब से बिछड़ना, उस वेदना से बिरह का निगमन हुआ।
जानकारी हो कि यूपी, बिहार के पूर्वाँचल क्षेत्रों में बिरहा गायी जाती रही है और इस क्षेत्र में इसका अपना ये अस्तित्व अभी भी कायम है।इसकी एक भव्य रूप- रेखा है बिरहा एक ऐसी विधा है जिसमें किसी भी परिस्थिति को आत्मसात किया जा सकता है,चाहे राम-सिया की विरह हो या कृष्ण-राधा की, पौराणिक इतिहास हो या देशभक्ति, युगल प्रेमी हों या परिवार की विरह सभी के अपने रस हैं /
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भोजपुरी प्रशंसकों के बीच इसकी लोकप्रियता के आरोहन पर विजय लाल यादव ने खुशी जताई।
उन्होंने मौके पर पति -पत्नी के प्रेमालाप पर विरह गुनगुनाया-
१). पतरकू काहे बिजुरिया डारss, दिलवा मs आके समा जाss।
२). बिजुरिया मुने के सीना पर गिरला, पंख फहराय सभा में चहकल जब तितलिया।
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स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एक वीर रस विरह भी उन्होंने गाया-
शक्ति विमबलावती, रत्न गर्भावती
बन भयंकर सियाह मे लेती उमंग है
तरुणित विकट विम्बलोकृति धरा है
भरा है प्राँजल तूफानी प्रसंग है
अथक शक्ति-सागर उजाकर बना है
गर्वित भूकंप-कंप तालीन तरंग है
रंगत भरी भरी उस जवाँ की जवानी में
लहू लहरता सदा अंग-अंग है।
Birha is the heart of Bhojpuri
विजय ने कई भोजपुरी फिल्मों में काम भी किया है . बिरहा भोजपुरी की जान है यह बहुत ही पुराणी विधा है जिस कई रसों में गया जाता है प्रेम रस हो या वीर रस बिरहा में सब है . आइये विजय लाल यादव का ही गया हुआ एक वीर रस का विरहा .
विजय का कहना है कि विरह-गीत ही एक ऐसा मार्ग है जो सारे सुख-दुख से परे जनमानस पटल पर एकता को प्रतिबिम्बित करता है।
उनके अनुसार बिरह गीत कई तरह के हैं जिनमें कहरवा, ददरा, ठुमरी, लचारी, छपरहिया, पूर्वी, कजरी तिरताल एवम् छपताल बिरहा गीत काफी कर्णप्रिय एवम् सार्थक हैं।
भोजपुरी में चारे अक्षरा- पवन के विवाद पर बोलते हुए विजय लाल यादव ने दो टूक में कहा कि पवन वैसा कलाकार नहीं है जैसा उसपर आरोप लगा है और पवन और अक्षरा को चाहिए कि आपस में बैठकर कर इस विवाद को सुलझा लें।