Why SAWAN is considered a sacred month in Hinduism

हिन्दू सनातनी परम्परा में सावन के महीने को सर्वोत्तम महिना कहा जाता है . आज हम बात करेंगे क्यों है सावन का महिना सबसे ख़ास ? क्या इसके पीछे कोई पौराणिक कथाएं हैं ? वो कौन सी बात है जो इस महीने को सबसे पावन बनता है ? इस सावन के महीने के रहस्य को जानने के लिए पूरी आर्टिकल पढ़ें ? Why SAWAN is considered a sacred month in Hinduism ?

इसे और भी रोचक बनने हेतु हमने कई वीडियो गाने को भी सम्मिलित किया है जो मन को उस परमपिता परमात्मा के समीप ले जाता है . तो चलिए शुरू करते हैं सावन के महीने की रोचक रहस्यमयी कहानियाँ जिसका वर्णन हमारे कई शास्त्र करते हैं .

कर्पूर गौरम करुनावातारम : पवन सिंह

ऐसा कहा जाता है की भृगुवंशी में जन्मे ऋषि मृकंदु एवं उनकी पत्नी मरुद्मती के कोई संतान न होने के कारण बड़े दुखी थे. तत्पश्चात उन्होंने पुत्र हेतु शिव की अराधना प्रारंभ की. उनके तपस्या से शिव प्रसन्न हुए और दोनों ने पुत्र-प्राप्ति का वर माँगा. देवाधिदेव शिव ने स्वीकार कर दो वर ‘तेजस्वी-अल्पायु पुत्र’ व ‘बुद्धिहीन दीर्घायु पुत्र’ में से कोई एक चुनने को कहा. ज्ञानी ऋषि  मृकंदु एवं उनकी पत्नी मरुद्मती ने पहले वर को अर्थात  ‘तेजस्वी-अल्पायु पुत्र’ को चुना . और ये बालक ‘ऋषि मार्कंडेय’ के नाम से प्रसिद्द हुआ जिसकी चर्छा कई बार पुराणों में की गयी है.

बिन भोले के सावन अच्छा नहीं लगता : पवन सिंह


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हर साल आवत रही अशुभे झमेला- रितेश पाण्डेय

असामयिक मृत्यु की असह्य पीड़ा से मुक्ति के लिए पिता ने मार्कंडेय को शिव-भक्ति को कहा. आज्ञाकारी मार्कंडेय अपने आप को भूल शिवभक्ति में लीन हो गया. आखिरकार दिन ढलता गया और वो मृत्यु की घडी भी समीप आ गयी. अपने आप को सृष्टि के रचियता महादेव को समर्पित करते अपने जीवन के आखिरी क्षणों में शिवलिंग के आलिंगन में थे, तभी मृत्यु के देवता यमराज के दूत मार्कंडेय के प्राण लेने पहुंचे और अपने नाक मार्कंडेय के गर्दन की ओर बढे लेकिन भूलवश यमदूत के नाक का स्पर्श शिवलिंग से हो गया जिससे महादेव प्रकट हुए और क्रोध में यम पर प्रहार किया. इसप्रकार यम को हराकर बालक को दीर्घायु होने का वर दिया. पूरण कहते हैं की मार्कंडेय को अभयवर की प्राप्ति सावन के महीने में हुयी थी तबसे रोग-कष्ट नाशक शिव की अराधना सावन में अत्यंत लाभदायी होता है.

कोई मुफलिस हवे – पवन सिंह 

2. अपनी खास मान्यताओं के लिए प्रसिद्द सावन के महीने में एक कथा इस प्रकार भी है की भगवान् शिव सावन के महीने में अवतरित होकर अपने ससुराल गए थे जहाँ उनका स्वागत अर्घ्य और जल के अभिषेक से किया गया था .

पियवा हमार बहुराहवा हो – पवन सिंह 

काहे मन भावे ल मढैया – प्रमोद प्रेमी 

इस प्रकार परम्परिक रूप से यह माना जाता है की देवाधिदेव महादेव हर साल सावन के महीने अवतरित होकर अपने ससुराल आते हैं और पृत्वी वासियों के लिए शिव की कृपा पाने का यह सबसे सर्वोत्तम महिना है .  और इस प्रकार सावन का महिना भक्तों के लिए अति पावन है जिसमे गंगा में स्नान कर शुद्ध हो निर्मल मन से गंगाजल ले शिव का अभिषेक करते हैं.सावन महीने के महात्म्य की चर्चा जारी है .

कई और पौराणिक कथाएं हैं जिन्हें हम आज भी उतनी ही श्रद्धा के साथ अपनी आनेवाली पीढ़ियों को सौंपना चाहते हैं. कथा में जिस प्रकार से भोजपुरी संगीत का सम्मिश्रण है आशा है की आप सब को पसंद आया होगा . अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दे .

   आगे की कथा जानने-पढने व मनमोहक भक्ति संगीत के लिए के लिए यहाँ क्लिक करें

जुखाम नहीं धरे ए बाबा – पवन सिंह 

हर हर महादेव
ॐ शांति ! शांति ! शांति

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ऋग्वेद : RIGWEDA
सामवेद : SAMVEDA
यजुर्र्वेद : YAJURVWED
अथर्ववेद : Atharvaved

शिवपुराण : ShivPuran

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